अध्याय-16 सिर र्दद सिर के रोग
अध्याय-16
सिर र्दद सिर के रोग
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क्र |
रोग लक्षण |
औषधियॉ |
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सिर र्दद सिर के रोग |
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1 |
र्दद हथौडे की तरह, ललाट के दोनो तरफ,
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बेलाडोना |
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2 |
मलबद्धता या कब्जियत के कारण सिर र्दद होना |
नक्स वोमिका |
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3 |
मानसिक श्रम के कारण सिर र्दद |
अर्जेन्टम नाईट्रिकम |
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4 |
सिर में पढतें समय, र्दद प्रात: सुस्ती एंव आलस्य की प्रतिशेधक औषधि |
नेट्रम म्योर |
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5 |
सूर्योदय के साथ सिर र्दद शुरू होकर सूर्यास्त तक बना रहता है पुराने सिर र्दद की प्रमुख दवा |
एमिल नाइट्रेट |
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6 |
र्दद के स्थान को दबा कर सोने से र्दद में कमी , ऑखों में र्दद, अर्धकपारी के र्दद में |
इग्नेशिया |
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7 |
अनिद्रा के कारण होने वाले सिर र्दद, सिर के पिछले भाग में अधिक, मानसिक कारणों
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काली फॉस |
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आधा सीसी का र्दद |
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(अ)दायें पार्श्व का दर्द |
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1 |
र्दद सुबह सूर्योदय के साथ दाये भाग में |
सैगुनेरिया नाईट्रिका |
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2 |
दांये भाग के आधासीसी के र्दद, सूर्योदय से प्रारम्भ होकर सूर्यास्त तक |
साइलीसिया |
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(ब) बांये
पार्श्व का दर्द |
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1 |
बाये पार्श्व में
सूर्योदय के साथ सिर के आधे भाग में र्दद , सूर्यास्त तक |
स्पाईजेलिया |
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2 |
बायें भाग के आधा
सीसी के र्दद की एक उत्कृष्ट दवा |
सीपिय |
अध्याय-16
सिर र्दद, सिर के रोग
सर में र्दद कई कारणों से होता है अत: उपचार
पूर्व यह मालुम करना अत्यन्त आवश्यक हो जाता है कि सिर र्दद का कारण क्या है ,सिर में र्दद कई तरह का होता
है ,जैसे कि सिर के ऊपरी भाग में हथौडे मारने की तरह का र्दद,
कनपटीयो में तथा सिर के पिछले भाग में र्दद ,सिर में भारीपन इत्यादि ,उनमें से कुछ र्दद जो सूर्य उदय से सूर्यास्थ तक
सिर के आधे भाग में होता है ,जिसे आधे सिर का र्दद अर्धकपाली माईग्रन कहते है । यह र्दद मस्तिष्क के दाये
या बाये भाग में भौ के ऊपर होता है जो एक निश्चित समय से प्रारम्भ हो कर सूर्यास्त
तक बना रहता है । सिर र्दद के और भी कई कारण है जैसे पेट की खराबी ,नीद का पूरा न होना इंफलुएंजा
,खसरा
,मलेरिया
,एंव
बुखार ,ऑखों की कमजोरी या ऑखों के रोगों के कारण ,लू लगना ,शरीर मे विषाक्ता ,मानसिक कारण ,तनाव ,
आदि ।
अत: होम्योपैथिक सिद्धान्तानुसार
,लक्षण
मिलने पर दवाओं का निर्वाचन करना चाहिये ।
1-र्दद हथौडे की तरह, ललाट के
दोनो तरफ, (बेलाडोना) :- यह दवा यूरोप में पैदा होने वाले वृक्ष से बनाया जाता
है इसकी क्रिया शरीर के दाये ओर तथा मस्तिष्क एंव स्नायु ग्रथियों पर प्रधान रूप
से होती है । सिर र्दद में प्राय:
इसी दवा का प्रयोग अधिकतर किया जाता है परन्तु इसका सिर
र्दद हथौडे मारने की तरह होता है अर्थात ऐसा लगता है जैसे कि सिर फट जायेगा ,सिर र्दद झुकने एंव झटका लगने
से बढता है ललाट के दोनो तरफ यह र्दद अधिक होता है सिर में भारीपन मालुम होता है ,ऑखो लाल हो जाती है ,ऑखें बन्द करके रोगी चुपचाप
पडा रहता है ,हिलने डुलने से र्दद बढ जाता है ।
विषेश:- इस दवा का एक और विशेष लक्षण
है ,र्दद शरीर के किसी भी भाग में क्यों न हो अगर बिजली की भांति अचानक चमक कर
उसी क्षण चला जाता है तो बेलाडोना का व्यवहार अत्याधिक लाभकारी है ।
2- मलबद्धता या कब्जियत के कारण सिर र्दद होना (नक्स वोमिका) :- यह
दवा कुचला के बीज से तैयार की जाती है मलबद्धता या कब्जियत के कारण सिर र्दद होना ,अधिकाश व्यक्तियों का जिनका
पेट साफ नही रहता इसी वजह से उनकेसिर में र्दद या भारीपन बना रहता हो ,खटटी डकारें आती हो ,पेट भारी मालुम पडता हो,सिर में चक्कर आना ,नेत्र के उपर र्दद ,अत्याधिक शराब पीन या
धुम्रपान ,चाय ,काफी , इत्यादि के सेवन के कारण हो तो यह दवा अवश्य ही प्रयोग करना चाहिये इसका सिर
र्दद सुबह या रोग वृद्धि भी सुबह होती है । इस दवा का सेवन यदि कुछ दिनों तक
नियमित रूप से रात्री में करने पर कब्ज एंव पुराने से पुराना सिर र्दद ठीक हो
जाता है । नक्स के अत्याधिक सेवन से पक्षाधात होने की संभावना रहती है अत: इस दवा का मदर टिंचर या निम्न
शक्ति का प्रयोग अधिक नही करना चाहिये ।
3-मानसिक
श्रम के कारण सिर र्दद (अर्जेन्टम नाईट्रिकम) :- यह दवा रसायनिक योग कास्टिक नाईट्रेट आप सिलवर से बनती है ।
मानसिक श्रम के कारण सिर र्दद तथा ऑखों में जलन, ऊंचे मकान इत्यादि को देखने से चक्कर ,सिर का बडा होना , सिर र्दद में सिर कसकर बॉधने
से आराम मिलता है कानों में दपदपाहट की आवाज का सुनाई देना अर्जेन्टम के रोगी को
खुली हवा में आराम एंव गर्म हवा में कष्ट महसूस होता है ।
4- सिर में पढतें समय, र्दद
प्रात: सुस्ती एंव आलस्य की प्रतिशेधक औषधि (नेट्रम म्योर) :- इसका रसायनिक नाम सोडियम क्लोराईड है इस सूत्र Nacl इसकी विशेष क्रिया रक्त कणों की बनावट में जल के प्रवेश को नियंत्रित करना
है उसके रूप एंव तत्व की रक्षा करता है । सिर में पढतें समय र्दद प्रात: उठते समय फलकों का चिपकना ,सिर की चोट के कारण मस्तिष्क
का खराब हो जाता ,सिर र्दद के साथ ऑसू आना,
सुस्ती एंव आलस्य का बना रहना ,कब्ज,ऋतु के समय लडकीयों का सिर र्दद, लू लगने एंव गरमी के कारण सिर
र्दद , शरीर से अत्याधिक खुन या तरल पदार्थो के निकल जाने , परिश्रम क अभाव अत्याधिक नींद, अधिक नमकसेवन से उत्पन्न दोषों में यह दवा लाभकारी
है । डॉ शुशलन ने छठवे क्रम में प्रयोग की सिफारिश की है डॉ0 एलेन कहते है कि इसकी 30 वी शक्ति से उपर की शक्ति अधिक शीध्रता से आरोग्य
करती है । यह दवा सुस्ती एंव आलस्य की प्रतिशेधक औषधि भी है ।
5- सूर्योदय के साथ सिर र्दद शुरू होकर सूर्यास्त तक बना रहता है पुराने सिर
र्दद की प्रमुख दवा (एमिल नाइट्रेट):- यह एक रसायनिक योग एमिल एल्कोहल
और नाट्रिक ऐसिड से तैयार की जाती है ।
यह पुराने सिर र्दद की प्रमुख
दवा है रोगी को ऐसा लगता है कि उसका सिर फूला हुआ है ,सिर में भारीपन एंव र्दद बना रहना , चेहरे का रंग लाल होना,सिर र्दद अचानक होता है ,दिल की धडकने बढ जाती है लू
लगने से सिर में पीडा मासिक स्त्राव के समय बाये सिर में र्दद रहना ,सूर्योदय के साथ सिर र्दद
शुरू होकर सूर्यास्त तक बना रहता है ,बाद में घट जाता है ,क्वीनेन एंव क्लोरोफार्म के दुष्प्रभाव के कारण
होने वाले सिर र्दद में यह अचुक दवा है । र्दद अवस्थामें इसको 1-एक्स क्रम को सुधाने एंव 6-एक्स की गोलीयॉ देने से अच्छे
परिणाम मिलते है ।
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6-र्दद
के स्थान को दबा कर सोने से र्दद में कमी ,ऑखों में र्दद, अर्धकपारी के
र्दद में (इग्नेशिया):- इस दवा को फिलिपाईन ,चीन तथा कोचीन में पाये जाने बाले झाडीदार पौधे के बीज से तैयार किया जाता है
।
सिर में तीब्र र्दद मानो किसी ने कनपटी में खील
ठोक दी हो , र्दद के स्थान को दबा कर सोने से र्दद में कमी ,ऑखों में र्दद , अर्धकपारी के र्दद में ,शोक अवस्था मानसिक पीडा एंव सिर दर्द के बदलते स्थान
में यह विशेष स्थान की तरफ अधिक देर तक देखते रहने से सिर में र्दद, इस दवा का विशेष लक्षण है कि
व्यक्ति अपने दु:खों को किसी अन्य व्यक्ति के समक्क्ष प्रगट नही कर सकता ,मन में ही रखता है ,यह सिर र्दद की एक सफल दवा है
।
7-अनिद्रा के कारण होने वाले सिर र्दद, सिर के पिछले
भाग में अधिक, मानसिक कारणों (काली फॉस) – पोटेशिम हाइड्रेट अथवा कार्बोनेट को प्रर्याप्त मात्रा में ,जब फास्फोरिक ऐसिड के साथ
मिलाने पर प्रतिक्रिया में छार बनने लगे और फिर पानी उडाकर बनाया जाता है ।
इसकी क्रिया मानसिक एंव स्नायु कणों पर रक्त
कणों के पोषण पर अधिक होती है ,अत: मानसिक कारणों से जो रोग होते है उनमें यह अत्याधिक प्रभावी औषधि है ।
अनिद्रा के कारण होने वाले सिर र्दद,
र्दद सिर के पिछले भाग में अधिक होता है । मस्तिष्क में मन्द मन्द र्दद होता
है ,सिर में आलस्य तथा थकान अनुभव रतिक्रिया के बाद कमजोरी एंव सिर में हल्का
हल्का र्दद के साथ सिर में कमजोरी का अनुभव होना , ऑखों के सामने अंधेरा सा छॉ जाना मस्तिष्क की रक्तहीनता
, मस्तिष्क
में धक्का लगाना इत्यादि रोगो में यह अत्यन्त प्रभावकारी दवा है, यहॉ तक कि यह विद्यार्थियों
के सिर र्दद एंव जो व्यक्ति लिख पढा या बारीक कार्य ऑखों से करता है उनके सिर
र्दद मे भी उपयोगी है अन्य कारणों से होने वाले सिर र्दद में भी यह दवा उपयोगी है
। स्त्रियों के ऋतुकाल में होने वाले सिर र्दद एंव कानों में भनभनाहट की घ्वनी
सुनाई पडना , दृष्टि का कमजोर होने से सिर र्दद ,डर का भाव बने रहना , नजदीक की वस्तुओं का स्पष्ट दिखलाई न पडना ,किसी शोक या अन्य कारणों से
मानसिक तनाव के कारण नीद का ना आना एंव सिर में र्दद । यह एक बायोकेकमिक औषधि है
इसके क्रम या शक्ति के विषय में डॉ0
शुशलर ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि यह दवा 2-एक्स या 3-एक शक्ति दमा के रोगियों को
देना चाहिये परन्तु सिर र्दद में इसकी उच्च शक्ति अर्थात 30 या 200
क्रम की देने से अधिक लाभ होता है परन्तु बायोकेमिक
सिद्धान्तानुसार 6-एक्स या 12
एक्स ही अधिक लाभकारी है ।
आधा
सीसी का र्दद
आधा
सीसी या हेमीक्रेनिया माईग्रेन इस रोग में सिर के आधे भाग में र्दद होता है जैसे
दांये या बांये पार्श्व में र्दद जो सूर्योदय से प्रारम्भ हो कर सूर्यास्त तक
बना रहता है यह रोग नाक की श्लेष्मात्मक झिल्लियों की सूजन से भी हो सकता है
जिसे साईनोवाईटिस भी कहते है या शरीर के अन्दर खोखला भाग हो जाने से भी आधा सीसी
का र्दद होता है इसे अधकापारी भी कहते है
(अ)दायें
पार्श्व का दर्द
1- र्दद सुबह सूर्योदय के साथ दाये भाग में (सैगुनेरिया नाईट्रिका) :- इसे अमेरिका में पाये जाने वाले एक पौधे से तैयार किया
जाता है
इसका र्दद सुबह सूर्योदय के साथ दाये भाग में
होता है ,यह र्दद सूर्य के चढने के साथ ही साथ बढता जाता है दोपहर तक यह अपनी तीब्रावस्ता
में पहुंच जाता है सूर्य के ढलने के साथ ही साथ यह र्दद घटना शुरू हो जाता है एंव
सन्ध्या तक बिलकुल ठीक हो जाता है ।
2- दांये भाग के आधासीसी के र्दद, सूर्योदय से प्रारम्भ
होकर सूर्यास्त तक (साइलीसिया) :- इसे नदियों अथवा रेत में से निकाले जाने वाले एक चमकीले पाषण
चूर्ण द्वारा तैयार किया जाता है यह शीत प्रकृति की होते हुऐ भी नवीन रोगो में उष्णता
प्रधान होती है यह दवा भी दांये भाग के आधासीसी के र्दद की एक बेजोड दबा है इसका
र्दद भी ठीक सूर्योदय से प्रारम्भ होकर सूर्यास्त तक बना रहता है ,इसके रोगी में पेट सम्बन्धित
बीमारी कब्ज इत्यादि लक्षण होते है । सम्पूर्ण शरीर मे ठण्ड लगाना ठण्डी बायु
का सहन न होना ,दिन के ग्यारह बजे सिर में अधिक जोर का र्दद । विचित्र लक्षण यह है कि रोगी
सिर को ठड से बचाता है ।
(ब) बांये पार्श्व का दर्द
1-बाये पार्श्व में सूर्योदय के साथ सिर के आधे भाग में र्दद , सूर्यास्त तक (स्पाईजेलिया) :-इसे
इग्लैण्ड में पाये जाने वाली बनस्पति से तैयार किया जाता है इसका र्दद भी
सूर्योदय के साथ सिर के आधे बाये पार्श्व में होता है जो सूर्यास्त तक बना रहता
है ठण्ड एंव बरसात के दिनों में रोग
वृद्धि होती है, दर्द कभी कभी बायी ऑख तक बढता जाता है ।
2-बायें भाग के आधा सीसी के र्दद की एक उत्कृष्ट दवा (सीपिय) :- कटल नामक समुद्रीय मच्छली से यह दवा बनाई जाती है ।
यह बायें
भाग के आधा सीसी के र्दद की एक उत्कृष्ट दवा है डॉ0 लिपि का कहना है कि यह दवा सिर के बाये ओर के र्दद (अधकपारी) में फादेमन्द
दवा है । यह औरतो पर अपना विशेष प्रभाव दिखलाती है । जरायु की बीमारी के
साथ होने वाले सिर र्दद में दोनों तरफ के ललाट पर होने वाले दर्दो में भी यह अपना
विशेष फल दिखाती है । शान्त स्वाभाव की स्त्रियों में ,एंव जिन स्त्रियों को पानी में अधिक कार्य करना पडता
है अर्थात उनके हाथ पानी में भीगे रहते है उनके लिये इस दवा का विशेष महत्व है ।
इसका रोग 11 बजे से 4 बजे तक बढता है ठड लगने के पूर्व जुकाम होने के पहले ललाटों पर र्दद होता है ।
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