अध्याय-18 विविध रोग
अध्याय-18
विविध रोग
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क्र0 |
रोग |
औषधिय |
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1 |
शरीर में नये सेल्स
का निर्माण न होना |
कैल्केरिया फास |
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2 |
आक्सीजन को शरीर
में सब जगह पहुचाना |
काली सल्फ |
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3 |
लॅग को ताकत देने
वाली दवा |
एरिस्पडोंस्पर्मा
1-एक्स |
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4 |
शारीरिक एंव मानसिक
शक्ति हेतु |
एक्सरे 12-एक्स |
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5 |
रोगी हर काम में जल्दबॉज
|
सल्फूरिक ऐसिड |
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6 |
सोते समय ऑखों का
अधखुला रहना |
लाईकोपोडियम |
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7 |
सूर्य की गर्मी और
गैस की रोशनी से सिर दर्द |
नेट्रम कार्बोनिकम
,ग्लोनाईन ,लैकेसिस |
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8 |
छाई |
यूजेनिया जैम्बोस
क्यू |
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9 |
अवसाद ,चिन्ता ,
निराशा |
मेग्नीशिया कार्ब |
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10 |
शारीरिक तथा मानसिक
विकाश के रूक जाने पर |
मेरोडिनम |
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11 |
तनाव के लिये डॉ0
भटटाचार्य का नुस्खा |
हाइड्रेस्टिस केन,
सिपिया, इग्नेशिया, पेसीफलोरा फाइटोलक्का |
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12 |
आयुर्वेदिक दवा |
बृहमी एंव शखपुष्पी |
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13 |
चर्म रोगों में रक्त
शुद्ध करने के लिये - |
सार्सापेरिला |
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14 |
भूख न लगने पर |
जेन्टियाना ल्यूटिया 1-एक्स 3-एक्स |
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15 |
शराबियों के भूंख न लगने व भूंख की कमी में |
स्टर्क्युला क्यू |
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16 |
लीवर की खराबी की वजह से भूख न लगना |
वैनेडियम |
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अध्याय-18
विविध रोग
होम्योपैथिक चिकित्सा एक
लक्षण विधान चिकित्सा पद्धति है, इसमें होम्योपैथिक चिकित्सक किसी रोग का उपचार
न कर, लक्षणों का उपचार करते है चूंकि रोग लक्षणों का मिलान औषधियों के लक्षणों से
किया जाता है , जैसा कि इसके आविष्कर्ता डॉ0 हैनिमैन सहाब ने इसकी खोज में किया
था, वैसे तो होम्योपैथिक चिकित्सकों को अपने दैनिक चिकित्सा अवधि में औषधियों
के कई लक्षणों को खोजना अत्यन्त कठिन होता है परन्तु कुछ लक्षण ऐसे होते है जो
प्रथमदृष्या ही दिख जाते है, उनमें प्रमुख रूप से मानसिक लक्षण, व्यापक लक्षण,
और अन्त में रोग पर ध्यान देते हुऐ औषधियों के निर्वाचन से , कई ऐसे रोग है जो
बडे बडे चिकित्सकों की समक्ष में नही आते, परन्तु एक अच्छा होम्योपैथ उसे अपनी
छोटी छोटी दबाओं से ठीक कर देता है । यहॉ पर हम कुछ इसी प्रकार की दवाओं से उपचार
के विषय में जानकारी दे रहे है इसीलिये इस लेख का नाम हमने होम्योपैथिक के चमत्कार
रखा है ।
1-शरीर में नये सेल्स का निर्माण न होना (कैल्केरिया फास) :-
शरीर में नये सैल्स के निमार्ण न होने पर कैल्केरिया फास देना चाहिये क्योकि
कैल्केरिया फॉस का प्रभाव शरीर में नये नये सेल्स का निर्माण करना है । अगर शरीर
में कैल्केरिया फॉस की कमी हो जाये तो नये सैल्स का बनना बन्द हो जाता है । नये
सेल्स के न बनने से जो रोग उत्पन्न होते है उसमें कैल्केरिया फॉस का उपयोग
करना चाहिये । जब कोई औषधियॉ काम करना बन्द कर दे तो अधिक संभावना यही होती है कि
शरीर में नवीन सेल्स का निर्माण नही हो रहा है ऐसी स्थिति में इस दवा को 6-एक्स
या 12-एक्स में दिन में तीन बार नियमित कुछ दिनों तक प्रयोग करना चाहिये ।
2-आक्सीजन को शरीर में सब जगह पहुचाना (काली सल्फ):- काली सल्फ यह भी बायोकेमिक की औषधिय है
इसका मुख्य काम आक्सीजन को शरीर में सब
जगह पहुचाना है । आक्सीजन ही तो गर्मी पैदा करती है यदि यह न होतो शरीर ठडा महसूस
करता है आक्सीजन की कमी और कार्बन के बढ जाने से जितनी भी शिकायेते पैदा हो वे
सभी काली सल्फ की कमी से दूर हो जाती है । कैलिसल्फ शरीर के तन्तुओं में आक्सीजन
का प्रवेश बढा देता है । नये सैल्स के बनने में मदद करती है अत: कैल्केरिया फास
के साथ प्रर्यायक्रम से इस दवा को 6-एक्स या 12-एक्स पोटेंसी में दिन में तीन
बार नियमित देना चाहिये इससे पुराने सैल्स शीध्र झड जाते है । शरीर में नये सेल्स
बनने लगते है ।
3-लॅग को ताकत देने वाली दवा (एरिस्पडोंस्पर्मा 1-एक्स)
:- एरिस्पडोंस्पर्मा यह
दवा लॅग को ताकत देने वाली दवा है श्वास प्रश्वास केन्दों को प्ररित कर आक्सीजन
के मिश्रण सम्बधित दोषों को दूर कर देती है तथा रक्त में आक्सीजन की मात्रा को
बढाती देती है । एरिस्पडोंस्पर्मा 1-एक्स,या 6-एक्स में दिन में
तीन बार प्रयोग करना चाहिये ।
4-
शारीरिक एंव मानसिक शक्ति हेतु (एक्सरे 12एक्स):-
शारीरिक व मानसिक शक्ति हेतु एक्सरे 12-एक्स पोटेंसी में प्रयोग करना चाहिये
इससे मानसिक व शारीरिक शक्ति बढती है । यह दबा संजीवनी शक्ति को बल प्रदान करता है
। वैसे तो 30 पोटेंसी में लेने से भी उचित परिणाम मिलने लगते है । कुछ चिकित्सक
तो हर तीसरे दिन इसकी 200 पोटेसी का प्रयोग करते है । यह तो चिकित्सक के अनुभवों
पर निर्भर करता है ।
5-
रोगी हर काम में जल्दबॉज (सल्फूरिक ऐसिड) :- सल्फूरिक
ऐसिड का रोगी हर काम को जल्द बॉजी में करता है, इसका रोगी जो भी काम करना होता है उसे तुरन्त
करना चाहता है एक मिनट की भी देरी वह सहन नही कर सकता बेहद कमजोरी तो इस दबा का
चरित्रगत लक्षण है
ऐसे रोगी को सल्फूरिक
ऐसिड का रोगी समक्षना चाहिये इस दवा का प्रयोग 30 या उच्च शक्ति में प्रयोग किया
जा सकता है ।
6-
सोते समय ऑखों का अधखुला रहना (लाईकोपोडियम):-
डॉ0 लूजवेल्ट ने कहॉ है कि सोते समय ऑखों अधखुली रहती हो तो ऐसे व्यक्ति
लाईकोपोडियम दवा देना चाहिये । इस दवा का प्रयोग रोग स्थिति के अनुसार किसी भी
शक्ति में की जा सकती है ।
7-
सूर्य की गर्मी और गैस की रोशनी से सिर दर्द (नेट्रम
कार्बोनिकम ,ग्लोनाईन ,लैकेसिस) :- यदि सूर्य की गर्मी एंव गैस की
रोशनी से सिर र्दद होने पर नेट्रम कार्बोनिकम ,ग्लोनाईन ,लैकेसिस दबाओं का प्रयोग
करना चाहिये । इसी प्रकार सूर्य के ताप से या गर्मी या आग के पास काम करने पर रोग
लक्षण बढते हो तो उपरोक्त दबाओं के अतरिक्त ब्रायोनिया ,जैलसियम दबा को भी याद
करना चाहिये ।
8-छाई ( यूजेनिया जैम्बोस क्यू ) :- यूजेनिया
जैम्बोस क्यू यह दवा छाई पर लगाने वाली एक सर्वोत्तम दवा है जो प्राय: छाई को
ठीक कर देती है इस दवा को क्यू में लेकर छॉई पर लगाई जा सकती है या इसे
पेट्रोलियम जैली वेसलीन में मिला कर मलहम बना कर रख ले एंव आवश्यकतानुसार दिन में
दो तीन बार छॉईयों पर लगा सकते है ।
9--
अवसाद ,चिन्ता , निराशा (मेग्नीशिया कार्ब) :- अवसाद
,चिन्ता ,सांसारिक चिन्ताओं से निराशा आदि में मेग्नीशिया कार्ब देना चाहिये ।
यह दवा रोग स्थिति के अनुसार 30 शक्ति में या उच्च शक्तियों का भी प्रयोग
सिद्धान्तानुसार किया जा सकता है ।
10-शारीरिक
तथा मानसिक विकाश के रूक जाने पर (मेरोडिनम) :- यदि
रोगी का शारीरिक तथा मानसिक विकाश रूक गया हो तो ऐसी स्थिति में मेरोडिनम दवा को
याद करना चाहिये ।
11-
तनाव के लिये डॉ0 भटटाचार्य का नुस्खा (हाइड्रेस्टिस केन, सिपिया, इग्नेशिया,
पेसीफलोरा फाइटोलक्का):- तनाव के लिये डॉ0 भटटाचार्य
का नुस्खा, जो बहुत कारगर है । इसमें आप निम्न दवाओं को बतलाई हुई शक्ति एंव
मात्रा में आपस में मिला कर इसका मिक्चर बना कर उपयोग करे इसके अच्छे परिणाम
मिलते है । हाइड्रेस्टिस केन क्यू 1-औंस,
सिपिया 6 आधा औंस ,इग्नेशिया क्यू 2-ड्राम ,पेसीफलोरा क्यू 1-ड्राम, फाइटोलक्का
1-ड्राम, इन पॉचों दवाओं का मिक्चर बनाकर दस दस बूंद दिन में तीन बार देने से
तनाव कम हो जाता है ।
12-
आयुर्वेदिक दवा में बृहमी एंव शखपुष्पी :- आयुर्वेदिक
दवा में बृहमी एंव शखपुष्पी का चूर्ण सम मात्रा में मिला कर एक एक चम्मच सुबह
शाम लेने से तनाव डिप्रेशन एंव मानसिक रोगों में बहुत लाभ होता है ।
13-
चर्म रोगों में रक्त शुद्ध करने के लिये (सार्सापेरिला)
- चर्म रोगों में रक्त को शुद्ध करने के लिये सार्सापेरिला क्यू का प्रयोग
दिन में तीन बार करना चाहिये वैसे 30 पोटेंसी से भी अच्छे परिणाम मिलते है ।
14-भूख
न लगने पर (जेन्टियाना ल्यूटिया 1-एक्स 3-एक्स):- इस
दवा का प्रभाव पाक स्थली पर होता है अत: पाक स्थली के विभिन्न प्रकार की
बीमारीयों में इसका प्रयोग किया जाता है । इसके प्रयोग से भूंख बढ जाती है ,जिन्हे भूंख नही लगती उन्हे यह दवा टॉनिक की तरह से
प्रयोग करने को दिया जाता है । जेन्टियाना ल्यूटिया 1-एक्स 3-एक्स की चार चार
गोली दिन में तीन बार प्रयोग करना चाहिये ।
15-शराबियों
के भूंख न लगने व भूंख की कमी में (स्टर्क्युला क्यू):- वैसे तो यह शराबीयों की दवा है इसके उपयोग से शराब पीने की इक्च्छा कम हो
जाती है , ऐसे शराबी व्यक्ति जो शराब
पी कर अपना पाचन तंत्र खराब कर लेते है ऐवम जिन्हे भूंख नही लगती उन्हे यह दवा
देने से उनकी पाक स्थली में सुधार होता है एंव उन्हे समय पर भूंख लगने लगती है ।
वैसे तो इस दवा के सेवन से पाचन संस्थान को शक्ति मिलती है इससे रोगी को समय पर
भूंख लगने लगती है । अत: जिन रोगीयों को भूंख न लगे इस दवा के मूल अर्क में देने
से उनकी भूंख खुल जाती है । इस दवा से जो व्यक्ति शीध्र थक जाती है उन्हे भी लाभ
होता है । इस दवा की एक ड्राम मूल अर्क को दिन में तीन बार प्रयोग करना चाहिये ।
16-लीवर
की खराबी की वजह से भूख न लगना (वैनेडियम):-
इसकी क्रिया आक्सीजन देना तथा शरीर रक्त से दूषित पदार्थ को निकालना है । यह
लीवर की दशा को सुधारती है इससे जिन व्यक्तियो को लीवर की खराबी की वजह से भूंख
नही लगती इसके प्रयोग से उन्हे भूंख लगने लगती है इसी प्रकार टी बी रोग के
प्रारम्भिक अवस्था में जब रोगी की भूंख खत्म हो जाती है इस दवा को देने से यह
पाचन शक्ति को बढाती है एंव टॉनिक की तरह काम करती है । इस दवा को 6 एंव 30 शक्ति
में दिन में तीन बार प्रयोग करना चाहिये ।
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